कल्लू बोल रहा हूँ।


गुरू जी नमस्ते! पहचाना मैँ आपका शिष्य कल्लू बोल रहा हूँ। ''अरे ! कल्लू कैसे हो तुम ?? आज इतने सालो बाद मेरी याद कैसे आ गई ?? ...और मेरा फोन नम्बर कैसे मिल गया??'' गुरूजी ! फोन नम्बर ढ़ुंढ़ना कौन सा मुश्किल था ? जब प्यासे को प्यास लगती है तो जलस्रोत ढ़ुंढ़ ही... Continue Reading →

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