एक बै रामफल शहर मैं चला गया . शिला बाई पास रोहतक में
एक कवि समेलन होने लाग रहा था . रामफल भी थोडी बहुत तुक
बंदी कर लिया करता उसने भी आपना नाम कविया आली लिस्ट मैं
लिख वा दिया . अब दो -चार कविया पाछे आया नंबर रामफल का .
मंच पै जाके सुरु करा आपना शेर …
…. खागड़ ( सांड) पै खागड़ खागड़ पै खागड़ खागड़ पै खागड़
दर्शक बोले — वाह भाई वाह वा भाई वा .
रामफल फेर बोल्या — खागड़ पै खागड़ खागड़ पै खागड़ खागड़ पै खागड़
दर्शक फेर बोले — वा भाई वा वा भाई वा
रामफल इबके तेज़ आवाज़ मैं बोल्या — खागड़ पै खागड़ खागड़ पै खागड़ ………..
इबके दुखी हो कई बोले — यो किसा शेर कह सै भाई तू .
रामफल बोल्या — अरे तुम शेर कै गोली मारों . इतने खागड़ उपरा तली
चडा दिए इनका बैलेंस देखो जै एक भी पडा हो तै