Poem


KITNA HAI MUJHSE PYAR !!!!
न मै दीवाना कहती हूँ न तो पागल समझती हूँ
तेरी यादो को इन पैरों की अब पायल समझती हूँ
हमारे दिल की दूरी घट नहीं सकती कभी क्यूंकि
न तुम मुझको समझते हो न मै तुमको समझती हूँ

मोहब्बत एक धोका है मोहब्बत एक फ़साना है
मोहब्बत सिर्फ ज़ज्बातों का झूठा कारखाना है
बहुत रोई हैं ये आँखें मोहब्बत की कहानी पर
तभी तो जानती हैं कौन अपना और बेगाना है

समय की मार ने आँखों के सब मंजर बदल डाले
ग़म-ऐ-जज़्बात ने यादो के सारे घर बदल डाले
मै अपने सात जन्मो में अभी तक ये नहीं समझी
न जाने क्यूँ भला तुमने भी अपने स्वर बदल डाले

ये सच है की मेरी उल्फत जुदाई सह नहीं पायी
मगर महफ़िल में सबके सामने कुछ कह नहीं पाई
मेरी आँखों के साहिल में समुन्दर इस कदर डूबा
बहुत ऊंची उठीं लहरें पर बाहर बह नहीं पाई

एक ऐसी पीर है दिल में जो जाहिर कर नहीं सकती
कोई बूटी मेरे दिल के जखम अब भर नहीं सकती
मेरी हालत तो उस माँ की प्रसव-पीड़ा से बदतर है
जो पीड़ा से तो व्याकुल है मगर कुछ कर नहीं सकती

बहोत अरमान आँखों में कभी हमने सजाये थे
तेरी यादो के बन्दनवार इस दर पर लगाये थे
तुम्हारा नाम ले लेकर वो अब भी हम पे हस्ते है
तुम्हारे वास्ते जो गीत हमने गुनगुनाये थे !!

तुम्हारे साथ हूँ फिर भी अकेली हूँ ये लगता है
मै अब वीरान रातों की सहेली हूँ ये लगता है
न जाने मेरे जज्बातों की पीड़ा कौन समझेगा
मैं जग में एक अनसुलझी पहेली हूँ ये लगता है

इस दीवानेपन में हमने धरती अम्बर छोड़ दिया
उनकी पग रज की चाहत में घर आँगन छोड़ दिया
कुछ कुछ जैसे मीरा ने त्यागा अपना धन वैभव
कान्हा की खातिर ज्यूँ राधा ने वृन्दावन छोड़ दिया

ये दिल रोया पर आंसू आँख से बाहर नहीं निकले
हमारे दिल से तेरी याद के नश्तर नहीं निकले
तुम्हारी चाहतो ने इस कदर बदनाम कर डाला
किसी के हो सके हम इतने खुशकिस्मत नहीं निकले

जो दिल मेरे सीने में है …..
कैसे कहू ये मेरा अपना है
रहने लगा इसमें कोई
इस पर तो कब्ज़ा अब उसका है
गम, नफरत, इर्ष्या ,जलन भी
तो रहते है इसमें बड़े मजे से
और …
सांसो की ओट में ये पागल
ले रहा है एक दिलनशी का नाम
तो फिर मै कैसे कहू के ये मेरा अपना है

कांप जाता हूँ ,अचानक ये सोचकर
की कही एक दिन किसी को
दिखाई न दे जाए इस चोर का
असली चेहरा …
ये किसी के प्यार में रो रहा है
लहू का नाम दे आंसुओं को छुपा रहा है
खोया पड़ा है ये किसी की यादो में
गमो को समेटे अपने आगोश में
तुम्ही बताओ यारो…………….

तो मै कैसे कहू ये मेरा अपना है

मैं बैठा दूर परदेश में
घर में आज दिवाली है
मेरा आँगन सूना है
माँ की आँखों में लाली है

वो बार बार मुझे बुलाती है
फिर अपने दिल को समझाती है
मेरी भाग्य की चिंता पर
अपने मातृत्व को मनाती है

मैं कितना खुदगर्ज़ हुआ
पैसो की खातिर दूर हुआ
मेरा मन तो करता है
पर न जाने क्यूँ मजबूर हुआ

आज फटाको की आवाजों में
मेरी ख़ामोशी झिल्लाती है
कैसे बोलूं माँ तुझको
तेरी याद मुझे बहुत आती है

इतना रोया मैं, आज कि
मेरी आँखें अब खाली है
तुझ से दूर मेरे जीवन की
ये पहली एक दिवाली है

माँ,मेरा आँगन सूना है
तेरी की आँखों में लाली है …..

कोई दीवाना कहता हैं कोई पागल समझता हैं
मगर धरती कि बेचैनी को बस बादल समझता हैं
मैं तुझसे दूर कैसा हू, तू मुझसे दूर कैसी हैं
यह तेरा दिल समझता हैं या मेरा दिल समझता हैं

की मोहब्बत इक एहसासों कि पावन सी कहानी हैं
कभी कबीरा दिवाना था कभी मीरा दिवानी हैं
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आखो में आसू हैं
जो तू समझे तो मोती हैं जो न समझे तो पानी हैं

मत पूछो कि क्या हाल है मेरा तेरे आगे
तू देख के क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे

समंदर पीर का अन्दर हैं लेकिन रो नहीं सकता
यह आसू प्यार का मोती हैं इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बादल बैठा तो हंगामा

कोई दीवाना कहता हैं कोई पागल समझता है
मगर धरती कि बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हू,तू मुझसे दूर कैसी है
यह तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

मोहब्बत इक एहसासों कि पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दिवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आखो में आंसू है
जो तू समझे तो मोती हैं जो न समझे तो पानी है

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया यूँ प्यार का किस्सा
कभी तुम सुन नहीं पाए, कभी मैं कह नहीं पाया

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बादल बैठा तो हंगामा

मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करता है
भरी महफ़िल में भी रुसवा हर बार करता है
यकी है साड़ी दुनिया को खफा है हमसे वो लेकिन
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है

मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थप-थपाते हैं
मैं हँसता हूँ तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं

मत पूछो कि क्या हाल है मेरा तेरे आगे
तू देख के क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे

समंदर पीर का अन्दर हैं लेकिन रो नहीं सकता
यह आसू प्यार का मोती हैं इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता

reply of वो कहती है पीता क्यूँ हूँ ?

सब कहते है तू पीता क्यों है,
दिल कहता है तू जीता क्यों है,
मिला क्या है मुझे गम के सिवा,
पाया क्या है मैंने गम के सिवा,
गम भूलने को पीता हूँ,
गम मिटने को पीता हूँ,
तो क्या बुरा करता हूँ,
सब कहते है तू पीता क्यों है,
दिल कहता है तू जीता क्यों है!

दिन है की रात है क्या मालूम,
गम की रात है या बरसात है क्या मालूम,
पीता हूँ बस गम बुलाने को, और मुझे क्या मालूम,
गम भूलने को पीता हूँ,
गम मिटने को पीता हूँ,
तो क्या बुरा करता हूँ,
सब कहते है तू पीता क्यों है,
दिल कहता है तू जीता क्यों है!

अपनों से मुझे मिला क्या,
बेगानों ने मुझे दिया क्या,
मैं अकेले रहा या किसी के साथ रहा,
मुझे ग़मों के सिवा, हर पल ज़िन्दगी ने दिया क्या,
ज़िन्दगी बुलाने को पीता हूँ,
ज़िन्दगी मिटाने को पीता हूँ,
तो क्या बुरा करता हूँ,
सब कहते है तू पीता क्यों है,
दिल कहता है तू जीता क्यों है!!!

3 thoughts on “Poem

Add yours

  1. This temple occupies a special place in the galaxy of ancient sacred spots of Ujjain. Seated between the idols of Mahalaxmi and Mahasaraswati, the idol of Annapurna is painted in dark vermilion colour. The Sri Yantra, the symbol of power or shakti, is also enshrined in the temple.
    Now :- Ujjain

Share ur Jokes...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Up ↑

%d bloggers like this: